Methods Of Teaching In Hindi And Teaching Aids

METHODS OF TEACHING IN HINDI and TEACHING AIDS

Types of Teaching Aids

There are many aids available these days. We may classify these aids as follows-

. Visual Aids

. Audio Aids

. Audio – Visual Aids

1) Visual Aids
The aids which use sense of vision are called Visual aids. For example :- actual objects, models, pictures, charts, maps, flash cards, flannel board, bulletin board, chalkboard, overhead projector, slides etc. Out of these black board and chalk are the commonest ones.

2) Audio Aids
The aids that involve the sense of hearing are called Audio aids. For example :- radio, tape recorder, gramophone etc.

3) Audio – Visual Aids
The aids which involve the sense of vision as well as hearing are called Audio- Visual aids. For example :- television, film projector, film strips etc.

Methods Of Teaching In Hindi And Teaching Aids

Methods of Teaching

 

1. आगमन विधि (Inductive Method) :

आगमन विधि में हम पहले बच्चों को उदाहरण देते हैं | बच्चों को प्रत्यक्ष अनुभव तथा उदाहरण अच्छी तरह से समझ जाते हैं | अतः जब अध्यापक उदाहरण देता है तो बच्चे उसे जीवन से संबंधित कर के अच्छे से सीख लेते हैं | यह विधि विशिष्ट से सामान्य की ओर चलती है | प्राथमिक स्तर पर ही है सबसे अच्छी विधि है|

Inductive Method :

The inductive method of teaching means that the teacher presents the rule through situations and sentences and does guided practice and the learners do free practice, then the teacher deduces or elicits the rule from the learners themselves.

 

2. निगमन विधि (Deductive Method):

निगमन विधि में हम पहले नियम देते हैं | बच्चा नियमों को आत्मसात करके तेजी से सीख लेता है | बाद में वह नियमों से नियम बनाना भी सीख लेता है | गणित और व्याकरण में यह विधि सबसे ज्यादा सफल होती है | यह विधि सामान्य से विशिष्ट की ओर चलती है | यह विधि उच्चतर स्तर पर अपना ही जाती है |

Deductive Method : The deductive method of teaching means that the teacher presents the rule , gives a model then the learners do free practice and answer exercises. 

 

 

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3. हुरिस्टिक शिक्षण (Heuristic Method) :

स्वाभाविक शिक्षण में बच्चा अपने आप खोजबीन करके सीखता है | इस शिक्षण में अध्यापक की सहायता और परामर्श की जरूरत नहीं पड़ती | बच्चा खुद ही समस्या का समाधान निकलता है | इस विधि में अध्यापक बच्चों की समस्या के लिए प्रशन दे देता है और वहां से हट जाता है जब बच्चे उसका हल खोजते हैं |

Heuristic Method  : A problem is placed before the learners and they are asked to find the solution of the problem through various literacy means, like library, laboratory, and workshops etc. Teacher’s role is to initiate the learning and pupils are active throughout the learning process. By using their creative thinking and imaginative power, they try to find out the relevant solutions based on some logic. They learn by self-experience.

 

4. व्याख्यान विधि (Lecture/Descriptive method) :

इस विधि में अध्यापक एक पाठ को तैयार करके आता है और किसी विषय के विविध पक्षों को विद्यार्थियों के सम्मुख प्रस्तुत करता है | यह विधि शिक्षक केंद्रित है | इस विधि का प्रयोग उच्चतर की शिक्षा के लिए किया जाता है |

Lecturing : The lecture method is just one of several teaching methods, though in schools it’s usually considered the primary one. The lecture method is convenient for the institution and cost-efficient, especially with larger classroom sizes. This is why lecturing is the standard for most college courses, when there can be several hundred students in the classroom at once; lecturing lets professors address the most people at once, in the most general manner, while still conveying the information that he or she feels is most important, according to the lesson plan.

 

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4. वृहत / विस्तृत शिक्षण (Macro teaching) :

वृहत शिक्षण का अर्थ विस्तार तरीके से पढ़ाने से है | वृहत शिक्षण में अध्यापक एक ही समय में सभी छात्रों को सूचना प्रदान करता है | यह  शिक्षण पूरी कक्षा को लेकर होता है ना कि सूक्ष्म शिक्षण की तरह छोटे छोटे समूहों में | वृहत शिक्षण व्याख्यान विधि पर आधारित होता है  | वृहत शिक्षण में छात्रों की संख्या ज्यादा होती है |

Macro teaching:

Macro teaching occurs when a teacher provides instruction to the entire class at one time for an extended period of time, usually longer than 10 minutes. Macro teaching is often done in lecture format, and may be used to introduce a new concept, such as adding, or to practice a new skill, such as sounding out new words. Another component of macro teaching occurs when a teacher is developing lesson plans. Macro lesson planning involves mapping out the bare bones of the entire school year with regard to what material — such as long division or spelling concepts — will be taught over the span of the school year

 

 

6. पेस्टालॉजी विधि (Pestalozzi Method) :

पेस्टालॉजी विधि के प्रवर्तक जॉन हेनरी पेस्टालॉजी थे जिन्होंने शिक्षा का मनोवैज्ञानिक बनाया | इन्होंने शिक्षा शास्त्र पर बल दिया अर्थात अध्यापक को यह पता होना चाहिए कि बच्चों को कैसे पढ़ाना है, बच्चे किस आयु में कैसे सीखते हैं, बच्चे किस विधि से ज्यादा सीखते हैं आदि | इन के अनुसार शिक्षा स्वाभाविक प्रक्रिया है | मनुष्य के वृक्ष के समान है तथा वातावरण से पोषण लेकर फलता फूलता है | ऐसे ही बच्चों ने बच्चे अपने चारों तरफ के वातावरण से सब कुछ सीखता है और आगे बढ़ता है | इन्होंने बालक की क्रियाशीलता के आधार पर करने करके सीखने पर बल दिया

Pestalozzi Method : The Pestalozzi method is a whole-child approach that emphasizes the development of all aspects of a person, including the head, heart, and hands. When studying Pestalozzi, this is the most important concept to grasp, so let’s take a more in-depth look at his philosophical standpoint and his method of schooling.

 

 

7. परिचर्चा विधि (Discussion Method) :

इस विधि में छात्र और अध्यापक आपस में किसी विषय पर चर्चा करते हैं | इस विधि के द्वारा सभी अपने अपने विचार रखते हैं | कई बार छात्र किसी विषय को लेकर विभेद भी करता है | इस विधि के द्वारा बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है क्योंकि सभी छात्र अपने अपने विचार प्रस्तुत करते हैं |

 

8. निरूपण / निदर्शन विधि (Demonstration) :

जब अध्यापक रोचक उदाहरणों, चार्ट। नक्शे। मॉडल। प्रोजेक्टर तथा अन्य प्रकार की शिक्षण सामग्री का प्रयोग करके पढ़ाता है तो या निरूपण विधि कहलाती है | यह  एक बाल केंद्रित विधि है यह शिक्षण की सर्वोत्तम विधि मानी जाती है |

Demonstrating :

Demonstrating, which is also called the coaching style or the Lecture-cum-Demonstration method is the process of teaching through examples or experiments. The framework mixes the instructional strategies of information imparting and showing how. For example, a science teacher may teach an idea by performing an experiment for students. A demonstration may be used to prove a fact through a combination of visual evidence and associated reasoning.

 

9. टोली समूह शिक्षण (Group Teaching) :

समूह शिक्षा या टोली शिक्षण, शिक्षण की एक सुव्यवस्थित प्रणाली है जिसमें कई शिक्षक मिलकर विद्यार्थियों के एक समूह को अनुदेशन प्रदान करते हैं और एक साथ मिलकर किसी विशिष्ट प्रकरण के लिए शिक्षक का उत्तरदायित्व लेते हैं | इसमें दो या दो से अधिक शिक्षक भाग लेते हैं | इसमें शिक्षण विधियों की योजना, समय तथा प्रक्रिया लचीली रखी जाती है ताकि शिक्षण उद्देश्य के अनुसार तथा शिक्षकों की योग्यता के अनुसार समूह शिक्षण के कार्यक्रम में आवश्यक शिक्षित परिवर्तन लाए जा सके |

 

10. उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) :

उपचारात्मक शिक्षण निदानात्मक मूल्यांकन के बाद होता है | जिन जिन बच्चों को किसी विशिष्ट पार्ट में दिक्कत आ रही है उन्हीं बच्चों को पढ़ाना उपचारात्मक शिक्षण कहलाता है | इस शिक्षण में हम उसी स्तर की बात करते हैं जिस तर में बच्चों को समस्या ना कि पूरा का पूरा दोबारा से पढ़ाने की |

Remedial education, also known as basic skills development, is instruction provided to students who need more support in core areas such as reading and math. These students qualify for remediation because of their poor performance in those areas. This instruction can be provided in different ways.

 

Note : This Study Material is Under ‘Fair Use’

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